राष्ट्र की बात ( Rashtra ki Baat )

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शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

74वा स्वतंत्रता दिवस Indian Independence Day

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74वा स्वतंत्रता दिवस Indian Independence Day

नमस्कार दोस्तों आज भारत के लिए बोहत ही बड़ा और बोहत ही खूबसूरत दिन है दोस्तों हम सभी को अपने ऊपर बोहत ही गर्व होना चाहिए कि हमने इस महान देश में जन्म लिया जहाँ न जाने कितने वीरों ने जन्म लिया और न जाने कितने  देश भक्तो ने अपने प्राण इस देह के लिए न्योछावर कर दिया ये देश उन वीर देश भक्तो का है जिन्हे हम श्री सुभाष चंद्र बोस, श्री चन्द्र शेखर आज़ाद, श्री भगत सिंह, और महाराणा प्रताप, श्री महात्मा गांधी, श्री वीर सावरकर,  महान शिवा जी और अनेको ने देश भक्तो का है 




पर इस बार भारत के प्रधान मंत्री जो की श्री नरेन्द्र मोदी जी है जो की 7वी बार भारत का तिरंगा लाल किले पर लेहरायेगे और भारत की जनता को संबोधित करेंगे!

जय हिन्द

रविवार, 9 अगस्त 2020

Chandragupta maurya episode 105 to 124

Chandragupta maurya episode 105 to 124

अब तक आपने देखा कि चंद्रगुप्त गंधार के राजा अम्बिक कुमार को मारकर गंधार का राजा बन जाता है। और दूसरी तरफ भदरसाल तक्षशिला में आचार्य सुखदेव के साथ मिलकर अपनी हार का बदला लेने के लिए चंद्रगुप्त से मौके की तलाश में होता है चाणक्य को उनके सूत्रों से भदरसाल द्वारा चंद्रगुप्त के खिलाफ साजिश का पहले से ही पता चल जाता है। इसलिए चाणक्य  भदर साल को भ्रम जाल की स्थिति में फंसाने का प्रयास करते हैं। और चाणक्य भद्रसाल को तक्षशिला में ही रोके रखने का प्रयास करता है। 
वह जब भदरसाल चंद्रगुप्त को मारने के लिए उसके महल में आता है तो चंद्रगुप्त की सेना भद्रसाल को बंदी बना लेती हैं। दूसरी तरफ चंद्रगुप्त अमात्य राक्षस से उनकी राज मुद्रिका का छाप ले लेता है ।जिससे कि वह भविष्य में उसका प्रयोग करके उसका फायदा उठा सकें। इस तरह चाणक्य जानता था कि उनके शत्रु बेहद ही चतुर और कूटनीति में माहिर है। इसलिए चाणक्य ने भी धनानंद को पराजित करने के लिए साम , दाम , दंड , भेद की नीति के तहत चंद्रगुप्त को आगे बढ़ाते हुए उसे मगध का वह अखंड भारत का सम्राट बनाने के लिए अपने कदम बढ़ाए। एक कार्य को पूरा करने के बाद अमात्य राक्षस वापस मगध लौट रहा होता हैं। मगध लौटने के समय चाणक्य के द्वारा भदर साल के नाम से अमात्य राक्षस को एक पत्र लिखा जाता हैं। वह पत्र में यह लिखता है कि वह चंद्रगुप्त को मारने के लिए क्या करने वाला है तथा इसके लिए उसे अमात्य राक्षस की सहायता की जरूरत पड़ेगी। भद्रसाल के पत्र मिलने के बाद अमात्य रास्ते से वापिस लौटकर भद्र साल की मदद करने की  तरफ निकल पड़ते हैं। दूसरी तरफ चंद्रगुप्त राज मुद्रिका की सहायता से धनानंद को अमात्य के नाम से पत्र लिखकर मगध की विशाल सेना को तक्षशिला भूला लेता हैं। मगध की सेना तक्षशिला की तरफ कुच करती है। लेकिन चाणक्य के द्वारा पहले से ही एक भुने हुये जाल में फंस जाती हैं।दरअसल चाणक्य भदर साल , अमात्य राक्षस ओर मगद की विशाल सेना को तक्षशिला में बुला लेता है और वह खुद और चंद्रगुप्त अपनी विशिष्ट सेना की टुकड़ी को लेकर मगध में धनानंद पर हमला कर देते है और उसे मार देते हैं इस तरह मगध पर चंद्रगुप्त का शासन होता है।
चंद्रगुप्त धनानंद को पाटलिपुत्र में मार मगध साम्राज्य का शासक बन जाता हैं। इसके उपरांत चंद्रगुप्त के लिए अब आगे की राह इतनी आसान नही थी। एक तरफ़ जहाँ उसे अन्य छोटे प्रान्तों को मगध में सम्मलित करके अखंड भारत का निर्माण करना था। वहीं दूसरी तरफ़ दशकों से शोषित पीड़ित प्रजा की सेवा करनी थीं। पर इन सब चीजों को भी चंद्रगुप्त ने अपने गुरु चाणक्य की मदद से भलि भांति पूरा कर लिया पर चंद्रगुप्त औऱ चाणक्य के सामने अब जो एक बड़ी समस्या आकर ये खड़ी हो गयी थी कि चंद्रगुप्त धनानंद को मारकर मगध का शासक तो बन गया था मगर किसी तरह अमात्य राक्षस उनके बंधन में नही आ सका। चाणक्य ये जानते थे कि अमात्य राक्षस के होते हुए वे चंद्रगुप्त के एक बड़ा खतरा हैं और अमात्य चंद्रगुप्त को मारने की साज़िश कर सकते हैं। दूसरा अमात्य पूरे मगध में एक सबसे होशियार व अच्छे मंत्री थे जिनकी चंद्रगुप्त को शासन चलाने के लिए बहुत आवश्यकता थी। इसलिए चाणक्य चाहते थे कि वे आमात्य को मनाकर उन्हें चंद्रगुप्त का मंत्री बना थे जिससे कि चंद्रगुप्त अच्छे से शासन कर सकें।
    
अपने गुरु चाणक्य के कुशल मार्गदर्शन में चन्द्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश के अंतिम सम्राट घननंद को पराजित कर दिया और मगध का सम्राट बन गया। युद्ध में नंद राज्य के मंत्री और सेनापति या तो मारे गए या बंदी बना लिए गए परन्तु प्रधान अमात्य राक्षस उनके हाथ नहीं आया। अपने स्वामी घननंद के प्रति सेवकभाव रखते हुए वह किसी दूर प्रदेश में जाकर चन्द्रगुप्त मौर्य के विरुद्ध षडयंत्र करने लगा। राक्षस बहुत ही कुशल और योग्य प्रशासक था। उसी के बल पर मगध एक शक्तिशाली राज्य बन चुका था।

चाणक्य जब अपनी कूटनीति और सैनिकबल से राक्षस को पकड़ने में असफल हो गए तो उन्होंने राक्षस के परममित्र सेठ चंदनदास को मृत्युदंड देने की घोषणा कर दी। इस घोषणा को सुनकर राक्षस से रहा नहीं गया और वह उसके प्राण बचने के लिए वधस्थल पर जा पहुंचा और आत्मसमर्पण करके अपने मित्र चंदनदास को मुक्त करने की याचना की।

राक्षस के आने का समाचार सुनकर चन्द्रगुप्त और चाणक्य वहां पहुँच गए। राक्षस ने उनके सामने भी अपना अनुरोध दुहराया।

राक्षस का बुद्धिकौशल, उसकी नीतिकुशलता, प्रशासकीय योग्यता और कूटनीतिक चातुर्य का चाणक्य भी लोहा मानते थे। उन्होंने राक्षस से विनम्रतापूर्वक कहा – “अमात्य, हमारी दृष्टि में आपने मगध राज्य के विरुद्ध षडयंत्र किये हैं पर हम आप जैसे योग्य मंत्री को खोना नहीं चाहते। मगध राज्य की उन्नति के लिए जिस कर्मठता और सेवाभाव से आपने अनीतिक और क्रूर शासक घननंद के लिए कार्य किये हैं उसी प्रकार यदि आप सुयोग्य और नीतिपरक चन्द्रगुप्त के लिए प्रधान अमात्य का पद स्वीकार कर लें तो आपके मित्र के प्राण बच सकते हैं।

अपने मित्र के प्राण की रक्षा के लिए राक्षस के सम्मुख और कोई उपाय नहीं था। मगध राज्य के हित के लिए भी उसे चाणक्य का अनुरोध स्वीकार करना पड़ा. राक्षस द्वारा पद संभालने के बाद चन्द्रगुप्त मौर्य को अपने विराट साम्राज्य में कुशल प्रशासन की स्थापना में कोई कठिनाई नहीं आई।
पूरे भारत का साम्राट बनने के बाद चंद्रगुप्त के जीवन का आख़िरी सबसे बड़ा युद्ध सिंकंदर के सेनापति सेलुयकस से हुआ। सिकंदर के वक़्त भारत छोटे छोटे टुकड़ों में बंटा हुआ था। मगर चंद्रगुप्त के सम्राट बनने के बाद पूरा भारत एक था। सेलुयकस के साथ चंद्रगुप्त का भीषण युद्ध हुआ। जिसमें चंद्रगुप्त जीत गया। सेलुयकस ने हारने के बाद अपनी पुत्री हेलना का विवाह चंद्रगुप्त के साथ कर दिया। और वो मेसोपोटामिया वापिस लौट गया। 
इन सबके बाद चाणक्य चंद्रगुप्त ओर सब कुछ छोड़कर जंगल की तरफ़ चले जाते है। औऱ आख़िरी समय वो जंगलो में बिताते हुए अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र को लिखने में बिताते है। इसके पश्चात अमात्य राक्षस दुर्दरा का विवाह चंद्रगुप्त के साथ करा देते हैं। एक अच्छा शासन चलाने के बाद चंद्रगुप्त भी सन्यासी बन जाते है और राजपाठ को त्याग देते हैं।

Video Link- https://youtu.be/wQojAzaP-zQ


इस तरह समाप्त होती हैं चंद्रगुप्त और चाणक्य की जोड़ी की ये महान कहानी..........chandragupta maurya episode 106

chandragupta maurya episode 105 to 124

बुधवार, 5 अगस्त 2020

Ram Mandir Kab Hoga Ban Kar Teyaar

राम मंदिर कब बन कर तैयार होगा ???

नमस्कार मित्रो,



दोस्तों आप सभी जानते हैं की 5 अगस्त 2020 को भारत के मुख्यमंत्री ने राम मंदिर का शिला पूजन किया था! अब तो ये आसान और स्थिर हो गया है की भारत में राम मंदिर बनेगा ही बनेगा और हम आपको बताएंगे! राम मंदिर को बनाने में लगभग 3 से साढ़े 3 साल लगेंगे! और उसे बनने का कार्य भारतीय कॉन्ट्रैशन कंपनी एलएंडटी (एलएंडटी) करेगी !
मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा अपने दो बेटों निखिल सोमपुरा और आशीष सोमपुरा के साथ करेंगे क्योंकि पहले भी सोमनाथ मंदिर को बनाने मे मे इसी परिवार का हाँथ रहा था और सदियों से इस परिवार को भारत के मंदिरों को बनाने का कार्य दिया जा रहा है लेकिन श्री राम मंदिर इस सदी का सबसे भव्य मंदिर बनेगा जिसकी अलौकिकता देखते ही बनेगी!



जय श्री राम, जयमल, नमस्कार

मंगलवार, 4 अगस्त 2020

धरा 370 ख़त्म होने के 1 साल पूरे हुए

धरा 370 ख़त्म होने के 1 साल पूरे हुए


जय हिन्द नमस्कार,




जी हा आपने सही सुना की धरा 370 ख़त्म हुई 1 साल 5 अगस्त हो जाएंगे पिछले साल 2019 को भारत सरकार ने 5 अगस्त के दिन राज्य सभा में भारत के गृह मंत्री अमित शाह जी ने धरा 370 ख़त्म कर दी जिसके 1 साल खत्म होने की खुशी दुगनी हो चुकी है क्यों की 5 अगस्त को राम मंदिर का निर्माण और भारत सरकार धरा  370 खत्म करने की खुशी भारत सरकार द्वारा 370 ख़त्म करने के क्या फ़ायदे जम्मू और कश्मीर को  हुए है ये सब भारत सरकार पुरे देश में सभी देश वाशियो को इसके बारे में प्रचार और न्यूज़ के माध्यम से बतएगी पर वही हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इस दिन को ब्लेक-डे के रूप में बांयेगा और भारत के खिलाफ गलत प्रचार करेगा 
इन सभी सवालों के जवाब भारत सरकार अपने तरीके से करेगी और दिन जम्मू और कश्मीर के लिए किसी विजय दिवस से कम नहीं है




जय हिन्द नमस्कार

पूर्व उत्तर भारत में बाढ़ और देश में हाहाकार

पूर्व उत्तर भारत में बाढ़ और देश में हाहाकार




नमस्कार आप सभी जानते है भारत मे इस समय कोरोना काल का समय तो है ही जो की बहुत बड़ी समस्या है पर भारत के उत्तरी पूर्वी छेत्र में इससे भी बड़ी समस्या है बाढ़ जो की हर साल भारत मे आती है पर ये सब कुछ जानते हुए प्रसाशन को इसका कोई फर्क नहीं पड़ता!  क्योंकि इस देश मे राजनीती तो होती है पर पर गरीबी और बाढ़ में फसे लोगो की भूख किसी को नहीं दिखाई देती है! पर आप और हम जैसे नागरिको का क्या इससे कुछ लेना देना नहीं है! क्या हम इतने खुदगर्ज हो गया है की हमे न तो आशम और बिहार के भूखे लोग और भूखे बच्चे नहीं दिखाई देते है अगर हम और आप सभी मिल कर आवाज़ उठाये तो क्या पता प्रसाशन की आँखे खुल जाये तो कुछ फ़र्ज़ हमारा भी बनता है अगर आप को हमारा ये ब्लॉग पसंद आये तो हमे फॉलो करे!



 

जय हिन्द नमश्कार

राम मंदिर का नया जन्म 5 अगस्त 2020

नमस्कार दोस्तों आज हम बात कर रहे है राम जी के मंदिर के बारे में जिसका नया जन्म हुआ है 







जी हां आपने सही सुना है की 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में श्री राम जी का मन्दिर का शिलान्यास किया जायेगा! जिसके मुख्य अतिथि होंगे भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्या मंत्री श्री योगी आदित्य नाथ! अब बात करते है राम मंदिर के जन्म की क्योकि आप सभी जानते है की राम मंदिर को बाबर ने तोडा था और उस पर मस्जिद बनवा दी थी! और तब से मंदिर और मस्जिद का फैसला नहीं हो पाया पर अब जो की 500 सालो बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर बनना तय हो गया है तो आप सभी ये समझ सकते है की अब जो ये फैसला हिंदुओं के आस्था के प्रति आया है तो मंदिर का पुनर निर्माण होना तय है जो की मंदिर के नए जन्म जैसा ही है ! 



जय हिन्द-जय श्री राम-नमश्कार

सोमवार, 3 अगस्त 2020

कोरोना वायरस - गुस्सा , मायूसी , नाराज़गी , उदासी.......

कोरोना वायरस - गुस्सा , मायूसी , नाराज़गी , उदासी.......
 ये शब्द जिनका अब पूरी दुनिया से वास्ता हैं।
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया मे मानव जीवन को ही बदल रख दिया। ये ही कारण है कि अब पूरी दुनिया के लोगों का अब इन शब्दों से गहरा वास्ता हैं (( गुस्सा , मायूसी , नाराज़गी , उदासी.......))
    ( 1 )  गुस्सा :- गुस्सा शब्द चीन और डब्लूएचओ के खिलाफ जिन्होंने कोरोना वायरस के फ़ैलने के ख़िलाफ़ कुछ नही किया। इसलिये पूरी दुनिया मे चीन के ख़िलाफ़ लोगों में ग़ुस्सा हैं।
( 2 ) मायूसी :- मायूसी शब्द पूरी दुनिया के सरकारों के प्रति जिन्होंने लोगों के गुस्से ओर उनकी जनभावनाओं को नही समझा। न ही कोरोना से लड़ने का ज़मीनी स्तर पर कोई युद्ध स्तर पर काम किया। सिर्फ़ बाते......
( 3 ) नाराज़गी और उदासी :- बस आम लोगो के इन दोनों विकल्पों के अलावा कुछ बचा भी नही हैं। उनके पास क्या अधिकार हैं। वो क्या कर सकते हैं ???
   बस समाप्ति की और सबके मन मे एक सवाल की आखिर ये कोरोना वायरस कब ख़त्म होगा ये कब जाएगा?????

74वा स्वतंत्रता दिवस Indian Independence Day

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